Rishi Prasad- A Spiritual Monthly Publication of Sant Sri Asharam Ji Ashram

ऋषि प्रसाद ने पूरा किया 400 अंकों का गौरवपूर्ण सफर

संत श्री आशारामजी आश्रम द्वारा प्रकाशित मासिक पत्रिका ‘ऋषि प्रसाद’ ने 36 वर्षों में 400 अंकों की गौरवमयी यात्रा पूर्ण करके विश्व के आध्यात्मिक प्रकाशनों के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ा है । इस पावन अवसर पर हम इसके प्रणेता एवं प्रेरणास्रोत पूज्य संत श्री आशारामजी बापू के श्रीचरणों में अनंत-अनंत वंदन करते हैं, जिनकी प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में ऋषि प्रसाद की ज्ञान-गंगा अखंड रूप से प्रवाहित हो रही है । हम इसके करोड़ों रसिक पाठकों का अभिनंदन करते हैं, जिन्होंने इसका आदरपूर्वक पठन-चिंतन करके अपने जीवन को ज्ञान-प्रकाश से आलोकित किया है । ऋषि प्रसाद को जन-जन तक पहुँचानेवाले पुण्यात्माओं का भी हृदयपूर्वक अभिवादन करते हैं, जिनके भगीरथ प्रयास से इसके सदस्यों एवं पाठकों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है ।

ऋषि प्रसाद की 400 अंकों की यात्रा एक अभूतपूर्व जीवन-परिवर्तक आध्यात्मिक क्रांति का स्मारक है । प्रत्येक मनुष्य की मूल आकांक्षा एक ही है : सच्ची सुख-शांति । इसकी पूर्ति होती है ब्रह्मज्ञान से, जिसका सरल व बोधगम्य भाषा में प्रचार-प्रसार करना ऋषि प्रसाद का मुख्य उद्देश्य है । ऋषि प्रसाद में प्रकाशित की जानेवाली सामग्री केवल शब्दों का संकलन नहीं अपितु मनुष्यमात्र की वास्तविक प्यास को बुझानेवाली ऐसी अमृतधारा है जिसका रसपान करने से अंतःकरण को शीतलता, दृष्टि को स्पष्टता और जीवन को सही दिशा प्राप्त होती है । यही कारण है कि घोर-से-घोर पापी व्यक्ति भी इसे पढ़ता है तो - क्षिप्रं भवति धर्मात्मा... वह शीघ्र ही धर्मात्मा हो जाता है ।

हिन्दी, मराठी, गुजराती, ओड़िया, तेलुगु, कन्नड़, बंगाली, तमिल और अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित किये जानेवाले इस प्रकाशन में वेद, उपनिषद्, गीता, भागवत, रामायण, महाभारत, पुराण आदि अनेकानेक सद्ग्रंथों का सार-ज्ञान तथा पूज्य बापूजी एवं अन्य महापुरुषों के अमृतवचन इस प्रकार संकलित किये जाते हैं जिससे वर्तमान युग की शारीरिक, मानसिक, नैतिक, आर्थिक, सामाजिक, राजकीय आदि विभिन्न प्रकार की पीड़ाओं से ग्रस्त समाज के विविध वर्गों का जीवन पीड़ारहित, सुखमय और समुन्नत हो । यह विद्यार्थियों के लिए सुसंस्कारों का मार्गदर्शक प्रकाश-स्तम्भ है, जो उनकी जीवन-नैया को विद्यार्थी अवस्था में ही सर्वनाश करनेवाली पाश्चात्य कुसंस्कारों की आँधी से बचाकर उनका सर्वांगीण विकास करने में सहायक होता है । यह युवाओं के लिए संयम, आत्मबल एवं लक्ष्यबोध प्रदाता सम्बल है । गृहस्थों के लिए कलियुग के कुटिलता से भरे वातावरण के कारण होनेवालीं अनेक प्रकार की चिंताओं, मानसिक तनाव और पारिवारिक कलहरूपी रोगों से बचानेवाली संजीवनी बूटी है । आत्मज्ञान के पिपासुओं के लिए यह सम्पूर्ण आध्यात्मिक ज्ञान का भंडार है, जिससे उनको अपनी-अपनी पात्रता के अनुसार अनेक प्रकार के साधन करते हुए आध्यात्मिकता के सर्वोच्च शिखर आत्मज्ञान तक पहुँचने का मार्गदर्शन मिलता है ।

यह प्रकाशन सभीका मंगल चाहनेवाली भारतीय संस्कृति की महानता को उजागर करके विश्व को सुख-शांति, सौहार्द और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का संदेश देनेवाला देवदूत है । देश, धर्म, संस्कृति एवं अध्यात्म आदि से जुड़ीं ताजी घटनाओं के विश्लेषण द्वारा यह सही-गलत, हितकर-अहितकर का नीर-क्षीर विवेक जगाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है । इसमें भारतीय संस्कृति के पर्व-उत्सवों के आध्यात्मिक, धार्मिक व लौकिक पहलुओं को इस प्रकार उद्घाटित किया जाता है कि हमारा पूरा जीवन एक उत्सव हो जाता है । यह आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, यौगिक चिकित्सा आदि का ज्ञान देकर शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य का खयाल रखनेवाली आरोग्यदायी माँ भी है । 

ऋषि प्रसाद के 400वें अंक की प्रकाशन-वेला में हमारा यह संकल्प है कि यह प्रकाशन आगे भी विश्ववासियों के जीवन को सर्वांगीण उन्नतिकारी ज्ञान के प्रकाश से देदीप्यमान करता रहेगा ।

- ऋषि प्रसाद सम्पादक एवं ऋषि प्रसाद परिवार